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Manthan Literature Festival 2020

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अप्रैल माह – कहानी लेखन...

क्या लेखन आपकी कल्पना की अभूतपूर्व उड़ान है ? क्या कहानियां एवं कथा साहित्य आपकी रूचि है ? क्या दूसरों की लिखी कहानियों को पढ़ आपको...

इतना शोर इतनी हाय

कल्पना में सत्यता का शब्द पिरोए हम-तुम रोएं, गांव की हो, आंचल ढंकती नहीं क्यों तुम सुहागन हों, चूड़ियां खनकती नहीं ‌क्यों, कामकाजी हो, हर वक्त चलती नहीं...

गुलाब

  रेड लाईट देखते ही पीयूष ने गाड़ी रोकी। आगे-पीछे कुछ और गाडियांँ खड़ी थी। वह रेड लाईट की ओर देख रहा था....उफ्फ! पूरे मिनट...

आधुनिक युग की ...

रंगोत्सव पर जन्मी,आजीवन श्वेताम्बरा, "छायावाद की सरस्वती " - कवयित्री महादेवी वर्मा बीन भी हूँ मैं, तुम्हारी रागिनी भी हूँ, नींद भी मेरी अचल, निस्पंद कण-कण...

कार और हाहाकार

शादी के बाद ससुराल (घर) में लंबे समय तक रहने का अवसर दो साल उपरांत मिला। तब जब नौकरी छोड़कर आगे पढ़ने की ठान...

माई की कत्थई साड़ी

  हवाई जहाज की खिड़की से बाहर सब कुछ धुला हुआ सा लग रहा था। अगर मौका कोई और होता तो शायद मान्यता पचपन की...

स्त्री मेरी पहचान

  स्त्री,नारी,कन्या,कांता ,परिणिता नारी का हर एक संबोधन कितना प्रभावित और आकर्षित है। नारी की उपमा पा मैं स्वयं को असीम भाग्यशाली समझती हूँ।"मेरी जननी...

वैश्या

कला संस्कृति संस्थान का अमृता साहित्यिक हॉल खचाखच भरा था।स्टेज के बीचोंबीच एक कुर्सी रखी थी जिस पर तेज स्पॉट लाइट पड़ रही थी...

ऐ वक़्त ,तू मुठ्ठी में...

  ऐ वक़्त ,तू मुठ्ठी में कब आयेगा यादों के भूले बिसरे हुऐ हुजरे ,तू कब वापस लायेगा! अब इंतिहा हो गई , आंखो में अशुओ का पुलिंदा...