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ख़ामोशी अच्छी नहीं

गर शोर है दिल में भरा, तो ख़ामोशी अच्छी नहीं जो ग़ैर हाथों में फँसी वो ज़िंदगी अच्छी नहीं इक बार की ही हार है, इस...

अब रूबरू अपने मुझे पाओगे नहीं तुम

अब रूबरू अपने मुझे पाओगे नहीं तुम जब तक के मोहब्बत से बुलाओगे नहीं तुम हाँ इसलिए भी तुमसे कभी रूठा नहीं हँ मैं जानता हँ मुझको...

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अप्रैल माह – कहानी लेखन प्रतियोगिता

क्या लेखन आपकी कल्पना की अभूतपूर्व उड़ान है ? क्या कहानियां एवं कथा साहित्य आपकी रूचि है ? क्या दूसरों की लिखी कहानियों को पढ़ आपको...

इतना शोर इतनी हाय

कल्पना में सत्यता का शब्द पिरोए हम-तुम रोएं, गांव की हो, आंचल ढंकती नहीं क्यों तुम सुहागन हों, चूड़ियां खनकती नहीं ‌क्यों, कामकाजी हो, हर वक्त चलती नहीं...

गुलाब

  रेड लाईट देखते ही पीयूष ने गाड़ी रोकी। आगे-पीछे कुछ और गाडियांँ खड़ी थी। वह रेड लाईट की ओर देख रहा था....उफ्फ! पूरे मिनट...

आधुनिक युग की मीरा – महादेवी वर्मा

रंगोत्सव पर जन्मी,आजीवन श्वेताम्बरा, "छायावाद की सरस्वती " - कवयित्री महादेवी वर्मा बीन भी हूँ मैं, तुम्हारी रागिनी भी हूँ, नींद भी मेरी अचल, निस्पंद कण-कण...