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Tag: Nature

The Trek Hum

  I feel, I profuse power inside my little fingers, The reverence of those peaks still lingers. Deep inside my mind and soul, The vivid valleys growl. The majestic...

चलते चलते

शाम रात ढलते ढलते तुम्हारी बात चलते चलते न जाने क्यों ठहर जाती है खामोशियाँ जुबान बनते बनते|   पत्ते शज़र से झरते झरते तितली भंवर सब बन संवरते न जाने...

Breezes are like

Breezes are, Like overly amorous paramours. They wrap themselves around You in sinuous waves of passion And hold you captive until You sigh and submit. Ah! How good that surrender...

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अप्रैल माह – कहानी लेखन प्रतियोगिता

क्या लेखन आपकी कल्पना की अभूतपूर्व उड़ान है ? क्या कहानियां एवं कथा साहित्य आपकी रूचि है ? क्या दूसरों की लिखी कहानियों को पढ़ आपको...

इतना शोर इतनी हाय

कल्पना में सत्यता का शब्द पिरोए हम-तुम रोएं, गांव की हो, आंचल ढंकती नहीं क्यों तुम सुहागन हों, चूड़ियां खनकती नहीं ‌क्यों, कामकाजी हो, हर वक्त चलती नहीं...

गुलाब

  रेड लाईट देखते ही पीयूष ने गाड़ी रोकी। आगे-पीछे कुछ और गाडियांँ खड़ी थी। वह रेड लाईट की ओर देख रहा था....उफ्फ! पूरे मिनट...

आधुनिक युग की मीरा – महादेवी वर्मा

रंगोत्सव पर जन्मी,आजीवन श्वेताम्बरा, "छायावाद की सरस्वती " - कवयित्री महादेवी वर्मा बीन भी हूँ मैं, तुम्हारी रागिनी भी हूँ, नींद भी मेरी अचल, निस्पंद कण-कण...