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Tags Poetry

Tag: poetry

नगरवधू

  कमल नयन कटोरे भरे जल की बदली, जाने कितने हाथों से बँधी वो कठपुतली... रखकर दाँव पर अपने आत्मसम्मान को, नगरवधू बन वो मासूम चली इक नगर...

घमंड और गुस्सा

  क्रोध क्या है कोई नहीं जान पाएं इसकी आग से तो महाकाल भी न बच पाएं परशुराम, सती कथा कुछ प्राचीन उदाहरण है क्रोध की आग ने...

Burning Cities & The Dark Dungeons

Those lost dark Dungeons were quiet and as merry as night The body moved on with fright...but the soul was strong enough to fight The body...

शिकायत

अब तो साँसे भी मेरी मुझसे , शिकायत कर चली है , लगता हैं अब वो भी मुझसे , किनारा कर चली है ; हिदायत क्या...

The Trek Hum

  I feel, I profuse power inside my little fingers, The reverence of those peaks still lingers. Deep inside my mind and soul, The vivid valleys growl. The majestic...

जरूरत

  ये मेरी कलम जरूरत के हिसाब से हर बात लिखती है, जज्बातों में डूबे खूबसूरत अल्फाज लिखती है कभी इकरार ,तो कभी इन्कार, कभी फरियाद लिखती...

Empty

Empty My mind is empty! The colourful world of my little child some dreams have faded like stars from the sky! The lost fragrance, I have been...

Her kind of love

Her vision was wild, Not just some ordinary kind, She loved diving into souls, In search of treasures, To understand, why scars were so beautiful, And what was the...

किताबों की दुनियाँ

किताबों की दुनियाँ बड़ी विचित्र है इन्होंने रचे जाने कितने चरित्र हैं कही अनकही सारी कहानी है इनमें कुछ बच्चों की ज़ुबानी है इनमें कई भाषा...

चलते चलते

शाम रात ढलते ढलते तुम्हारी बात चलते चलते न जाने क्यों ठहर जाती है खामोशियाँ जुबान बनते बनते|   पत्ते शज़र से झरते झरते तितली भंवर सब बन संवरते न जाने...

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अप्रैल माह – कहानी लेखन प्रतियोगिता

क्या लेखन आपकी कल्पना की अभूतपूर्व उड़ान है ? क्या कहानियां एवं कथा साहित्य आपकी रूचि है ? क्या दूसरों की लिखी कहानियों को पढ़ आपको...

इतना शोर इतनी हाय

कल्पना में सत्यता का शब्द पिरोए हम-तुम रोएं, गांव की हो, आंचल ढंकती नहीं क्यों तुम सुहागन हों, चूड़ियां खनकती नहीं ‌क्यों, कामकाजी हो, हर वक्त चलती नहीं...

गुलाब

  रेड लाईट देखते ही पीयूष ने गाड़ी रोकी। आगे-पीछे कुछ और गाडियांँ खड़ी थी। वह रेड लाईट की ओर देख रहा था....उफ्फ! पूरे मिनट...

आधुनिक युग की मीरा – महादेवी वर्मा

रंगोत्सव पर जन्मी,आजीवन श्वेताम्बरा, "छायावाद की सरस्वती " - कवयित्री महादेवी वर्मा बीन भी हूँ मैं, तुम्हारी रागिनी भी हूँ, नींद भी मेरी अचल, निस्पंद कण-कण...